''नसीहत''
मुझे आज भी है याद है
जब मैं दुल्हन बन
इस घर में आये थी
सासू माँ ने मुँह
दिखाई कि रस्म निभाई थी
वे बोली
नहीं दूँगी तुम्हे
सोने -चाँदी के जेवर
दूंगी बस
एक नसीहत
अगर रूप
है तुम्हारे पास
तो उससे
किसी को क्या लाभ
अगर शिक्षा
है तुम्हारे पास
तो आएगी
तुम्हारे काम
पर मीठी वाणी
वही दे सकती हो
इस परिवार को
बांध सकती हो
घर -संसार को
इसलिए खोल दो
ह्र्दय के द्वार
निकल दो मीठी वाणी का दरिया
सदा आस्वादन करो
सुख -शांति और प्रेम का
आज जब
अपनी फुलवारी को
महकती हुई पाती हूँ
तो श्रद्धा से
सासू माँ को
नमन करती हूँ
vandana bajpai
(10.12.13)
-
मुझे आज भी है याद है
जब मैं दुल्हन बन
इस घर में आये थी
सासू माँ ने मुँह
दिखाई कि रस्म निभाई थी
वे बोली
नहीं दूँगी तुम्हे
सोने -चाँदी के जेवर
दूंगी बस
एक नसीहत
अगर रूप
है तुम्हारे पास
तो उससे
किसी को क्या लाभ
अगर शिक्षा
है तुम्हारे पास
तो आएगी
तुम्हारे काम
पर मीठी वाणी
वही दे सकती हो
इस परिवार को
बांध सकती हो
घर -संसार को
इसलिए खोल दो
ह्र्दय के द्वार
निकल दो मीठी वाणी का दरिया
सदा आस्वादन करो
सुख -शांति और प्रेम का
आज जब
अपनी फुलवारी को
महकती हुई पाती हूँ
तो श्रद्धा से
सासू माँ को
नमन करती हूँ
vandana bajpai
(10.12.13)
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