सोमवार, 16 दिसंबर 2013

naari shakti

                                                      "नारी शक्ति "


ना घोड़े है न ही हाथी
ना रथ है ना सारथी
फिर भी आजन्म चलेगी
अब यह यात्रा नहीं रुकेगी


है हमे भी अधिकार
अपनी बात रखने का
बीत गया वो जमाना
छुप के सिसकने का 
कब तक अपनी बारी के लिए
राह एक नारी ताकेगी


बंद कर दोगे एक द्वार
तो दूसरा हम खोल लेंगे
कब तक हैवानियत को
आँसुओ का मोल देंगे
जो केह न पायी  जुबां
अब वो कलम कहेगी


हो चाहे रामायण कि जगह
महाभारत यहाँ
आगया है हर नारी में
अक्स द्रौपदी का जरा
पी के अपमान का घूँट
धरती में नहीं छुपेगी


कोयलो को अब नहीं
कौवो का सहारा चाहिए
दिल से पाक -साफ़ हो
तब आप साथ आइये
हैं रान न हो वक़्त कि
कसौटी सब को परखेगी

vandana bajpai
16.12.2013




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