शनिवार, 7 दिसंबर 2013

Bojh

                                                                  बोझ 

पार्क में अक्सर 
देखती हूँ
हमारे घर  की
कामवालियाँ     
बैठ जाती है
झुरमुट बनाकर
सुनाने लगती है 
किस्से 
शराब पी कर आये 
पति द्वारा पिटाई  के
पति की  बेवफाई के 
बच्चों के दर्द 
आटे दाल का भाव 
और आँसू पोंछ कर 
चली जाती है 
हलकी होकर 


और हम बड़े लोग 
अधरो पर बनावटी 
मुस्कान चिपकाये 
कई दर्द दिल में  दबाये 
झूठी शान का  टनो बोझ 
सर पर लिए 
पार्क में 
चक्कर पर चक्कर 
लगाते रहते है 
वजन 
घटाने के लिए 
vandana bajpai
(7.12.13) 
  

  


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