गुरुवार, 25 दिसंबर 2014

                !!!!!!!!!!!!!!कौन हूँ मैं !!!!!!!!!!!!!!

                                                (चित्र गूगल से साभार )

कितने पर्दों को लपेटे हुए
,कितने चेहरों को समेटे हुए
ढूढती रहती हूँ की कौन हूँ मैं 
अपनी पहचान से महरूम हूँ मैं

कभी मिलती हूँ ,सभी से खुलकर 
कभी रह जाती हूँ खुद में छिपकर
कभी खुशदिल ,कभी मगरूर हूँ मैं

पूजती हूँ तुझे जब ऐ मेरे खुदा 
लगती हूँ कुछ मीरा की तरह
तेरे ही नूर से पुरनूर हूँ मैं

बंदिनी हूँ मैं तेरी साथी हूँ
तू दिया है मैं तेरी बाती हूँ
हमकदम ,हमसफ़र हुजूर हूँ मैं

जब तेरा पालना झुलाती हूँ
माँ यशोदा को खुद में पाती हूँ
माँ की ममता से भरपूर हूँ मैं

जब भी मुसीबत घर पे मेरे आती है
जाने कैसे दुर्गा मुझमें समां जाती हैं
हूँ अबला मगर शक्ति का गुरुर हूँ मैं

टूटती रहती हूँ जुडती हूँ कई बार
एक ही जन्म में लेती हूँ जन्म हज़ार
जाने कितने नामों से मशहूर हूँ मैं

सच है एक रूप में नारी कहाँ समाती है
दो कुलो को क्या ये संसार को चलती है
जगह कोई भी हो हर जगह जरूर हूँ मैं

वंदना बाजपेयी
(एक गीत )

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