!!इतिहास !!
इतिहास कभी नहीं मरता
बार - बार
अपनी कब्र से निकल कर
उठ खड़े होते है
रक्तरंजित योद्धा
जिन्हें अश्रु -पुष्पों से सजाकर
कफ़न उढ़ाकर
हौले -हौले
थपकी देकर
सुलाया था कभी
आह !!
फिर चलने लगते हैं
तीर पर तीर
परन्तु विजय की आशा बेकार हैँ
क्योँकि इस युद्ध की परिणिति
पुनः -पुनः हार है
दुखद !
यह शब्द बाण
न जीने देते है
न मरने ..........
इतिहास कभी नहीं मरता
बार - बार
अपनी कब्र से निकल कर
उठ खड़े होते है
रक्तरंजित योद्धा
जिन्हें अश्रु -पुष्पों से सजाकर
कफ़न उढ़ाकर
हौले -हौले
थपकी देकर
सुलाया था कभी
आह !!
फिर चलने लगते हैं
तीर पर तीर
परन्तु विजय की आशा बेकार हैँ
क्योँकि इस युद्ध की परिणिति
पुनः -पुनः हार है
दुखद !
यह शब्द बाण
न जीने देते है
न मरने ..........
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