शुक्रवार, 13 जून 2014

दी डेथ ऑफ़ "यूरेका "




बूढ़ा आर्किमिडिज़ ...जो अब 80 साल का हो गया है। .... सफ़ेद लम्बी दाढ़ी , झुर्रीदार चेहरा , ठीक से चला नहीं जाता ,पर मन में अभी भी विज्ञानं के लिए , मानव समाज के लिए बहुत कुछ करने की अभिलाषा शेष है  अपनी पिछली जिंदगी के बारे में सोंचता जा रहा है । (फर्श पर ज्यामिति  की तमाम रचनाएँ चाक से बना रहा है )

उसे अभी  भी वो दिन अच्छी तरह से याद है कि किस तरह सैराक्वूज  के राजा हायरोन  ने उसे एक स्वर्ण मुकुट हकीकत पता लगाने को दिया था  .......नकली और असली में भेद कर पाना कितना कठिन था.…।   और कैसे उसने नहाते समय इस नियम को खोज लिया था कि कोई वस्तु पानी में डुबोने पर अपने भार के बराबर पानी हटा देती है ।ख़ुशी  में वो उसी अवस्था में यूरेका -यूरेका (मैंने पा  लिया ,मैंने पा लिया) कहते हुए राजमहल की और दौड़ा था।   इसी आधार पर उसने स्वर्ण  मुकुट की सच्चाई पता लगाई थी  . 

फिर ..................  फिर उसे कितना सम्मान मिला था ।कितना हौसला बढ़ा था। …
फिर कैसे उसकी यात्रा चल पड़ी विज्ञानं के अन्य अन्वेषणों की ओर ।

क्या - क्या नहीं सोंचा था उसने आगे करने को । वो चाहता था कि एक ऐसी राड मिल जाये जिसे लीवर की तरह इस्तेमाल कर पृथ्वी को उठाया जा सके । 

और उधर लोग कहते हैं कि सैराक्वूज  पर रोमन राज्य का शासन हो गया है .... देश छोड़ो ।यह सही है की उसने कई लीवर पर आधारित "युद्ध मशीनों "का निर्माण किया है। … पर उससे क्या ? कैसी बेकार बात है ..... भला मुझ बूढ़े वैज्ञानिक से किसी की क्या दुश्मनी हो सकती है ।अब उम्र के आखिरी पड़ाव में तो अपने ही देश में रहना है। … क्यों जाये भला विज्ञानं का सेवा करने वाला।

अभी कल ही की तो बात है ..... पडोसी सल्युसर आया था ...

सेल्युसर ....... महान  वैज्ञानिक आर्किमिडिज़ जी आप की जान को खतरा है ।रोमन , सैनिक आप को नहीं छोड़ेंगे ,आस -पास कही भी सर छुपा लो।

आर्किमिडिज़ ........ क्यों भला ,  मैंने क्या बिगाड़ा है किसी का ... मैं तो अपने काम में लगा हूँ, सम्पूर्ण मानव जाती की भलाई के लिए काम कर रहा हूँ ।मेरी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी तो नहीं है।

सेल्युसर ...... ठीक है ........ बताना मेरा फ़र्ज़ था ।आप सावधान रहिएगा,. 

आर्किमिडिज़ पुरानी  बातें याद करना छोड़ कर फिर काम में लग जाता है ।
ये गोल .......... इसकी त्रिज्या ......... ये पाई का मान २२ /७ .......  इस गोले में क्षेत्रफल ....................वो त्रिभुज उसका आयतन। …

घोड़ों के टापों की आवाज़ आ रही है ..... टप- टप- टप । तेज़ धूल उड़ रही है । रोमन सैनिक आर्किमिडिज़ का घर घेर लेते हैं । कुछ सैनिक घोड़े से उतरकर उसके घर की तलाशी लेते हैं  ।
 एक सैनिक आर्किमिडिज़ के पास जाता है । 

बूढ़ा आर्किमिडिज़ सर झुकाए अपने काम में तल्लीन है । उसे ना घोड़ों के टापों की आवाज़ सुनाई दे रही है ना उसे ये पता चल पाया कि वो चारों ओर से घिर गया है ।वो काम कर रहा है मानवता के लिए। .... सारी  सृष्टि के लिए। ....  हाँ आँख के कोर से उसे ये अहसास होता है की कोई उसके ज्यामिति के गोलों के पास आ रहा है ।भय है तो इस बात का कही काम में विघ्न न पद जाये।

आर्किमिडिज़ ..... ( सर झुकाए - झुकाए) ... अरे भाई ... आहिस्ता से अपना काम करो, देखो मेरी ये रचनाएँ ना ख़राब कर देना । बड़ी मेहनत से बनाई हैं । 

हत्यारा रोमन सैनिक एक क्षण के लिएउसकी मासूमियत पर  सकपकाता है .... अगले ही क्षण अपनी तलवार से आर्किमिडिज़ की गर्दन धड से अलग कर देता है ।.…… और एक महान वैज्ञानिक , उसकी वृताकार रचनायें ,क्षेत्रफल ,त्रिज्या सब दो राजाओं की दुश्मनी की भेंट चढ़ जाता है। …… साथ ही दो राजाओं की दुश्मनी की भेंट चढ़ जाती है .... विज्ञानं की अनुपम भेंट जो। .... जो शायद महान वैज्ञानिक के दिमाग में पाक रही थी। ....... विश्व वंचित रह गया फिर से यूरेका -यूरेका सुनने को 

वंदना बाजपेयी 

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