काव्य मन की भावना है
काव्य मन की भावना है
ज्ञान की गागर नहीं ,
अलंकारों , क्लिष्ट शब्दों में
सिमटता यह सागर नहीं।
अवधी में तुलसी लिखें
सूर ब्रिज-भाषा में गढ़ें
अनपढ़ कबीर के दोहे
ज्ञानी जन-मानस पढ़ें
है वही कवि जिसका ह्रदय
भावनाओं से भरा
मूक चेहरों में छुपे
जिसने हर दुःख को पढ़ा
आलोचकों,समालोचकों की
धारणा तब टूटती है
वेदना के पलों में जब
अनायास कविता फूटती है।
-Vandana Bajpai
काव्य मन की भावना है
ज्ञान की गागर नहीं ,
अलंकारों , क्लिष्ट शब्दों में
सिमटता यह सागर नहीं।
अवधी में तुलसी लिखें
सूर ब्रिज-भाषा में गढ़ें
अनपढ़ कबीर के दोहे
ज्ञानी जन-मानस पढ़ें
है वही कवि जिसका ह्रदय
भावनाओं से भरा
मूक चेहरों में छुपे
जिसने हर दुःख को पढ़ा
आलोचकों,समालोचकों की
धारणा तब टूटती है
वेदना के पलों में जब
अनायास कविता फूटती है।
-Vandana Bajpai
(photo credit: Google)
(edited)

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