सोमवार, 30 दिसंबर 2013

prayaas

                                                                     "प्रयास "



फिर शरू करनी है
एक नयी
 जददोजहद
पूस की धुंध में
सुखानी है
दुखो की चादर
जेठ की तपन में
ठंडा करना है
अपूर्ण स्वप्नो को
 खौलते मन में
बारिश की बूंदो में
अंनबहे आंसुओं को 
पी लेना है
गीली  आँखों से
हर साल की तरह
फिर इस बार
कर लेना है
समय का
पुल पार
सर पर लिए
अतीत की
गठरी का भार
vandana bajpai

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