"प्रयास "
फिर शरू करनी है
एक नयी
जददोजहद
पूस की धुंध में
सुखानी है
दुखो की चादर
जेठ की तपन में
ठंडा करना है
अपूर्ण स्वप्नो को
खौलते मन में
बारिश की बूंदो में
अंनबहे आंसुओं को
पी लेना है
गीली आँखों से
हर साल की तरह
फिर इस बार
कर लेना है
समय का
पुल पार
सर पर लिए
अतीत की
गठरी का भार
vandana bajpai
फिर शरू करनी है
एक नयी
जददोजहद
पूस की धुंध में
सुखानी है
दुखो की चादर
जेठ की तपन में
ठंडा करना है
अपूर्ण स्वप्नो को
खौलते मन में
बारिश की बूंदो में
अंनबहे आंसुओं को
पी लेना है
गीली आँखों से
हर साल की तरह
फिर इस बार
कर लेना है
समय का
पुल पार
सर पर लिए
अतीत की
गठरी का भार
vandana bajpai
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