"जुबान की धार "
तेज धार
कैंची कि नहीं
जुबान की
छील देती है
काट देती है
कर देती है
तार -तार
घावो से रक्त
नहीं निकलता है
फिर भी हर घाव
अंदर से सड़ता है
बनता नासूर
पकता -फूटता
बार-बार
यह चुभते तीर
मौलवी -पीर के
धागा बाँधने से
नहीं निकलते
घायल ताउम्र
तड़पता -रोता है
जार -जार
कोई विजयी नहीं होता
कोई शहीद नहीं होता
लेकिन मर जाता है
रिश्तो का प्यार
बढ़ जाती है
आपसी तकरार
चीर -फाड़
होता है अचरज
दो इंच की जुबान
तीर चला सकती है
युद्ध करा सकती है
इसके आगे है
हर कोशिश बेकार
हर -बार
vandana bajpai
तेज धार
कैंची कि नहीं
जुबान की
छील देती है
काट देती है
कर देती है
तार -तार
घावो से रक्त
नहीं निकलता है
फिर भी हर घाव
अंदर से सड़ता है
बनता नासूर
पकता -फूटता
बार-बार
यह चुभते तीर
मौलवी -पीर के
धागा बाँधने से
नहीं निकलते
घायल ताउम्र
तड़पता -रोता है
जार -जार
कोई विजयी नहीं होता
कोई शहीद नहीं होता
लेकिन मर जाता है
रिश्तो का प्यार
बढ़ जाती है
आपसी तकरार
चीर -फाड़
होता है अचरज
दो इंच की जुबान
तीर चला सकती है
युद्ध करा सकती है
इसके आगे है
हर कोशिश बेकार
हर -बार
vandana bajpai
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें