शुक्रवार, 27 दिसंबर 2013

jubaan ki dhaar

                                                     "जुबान की  धार "




तेज धार
कैंची कि नहीं
जुबान की
छील देती है
काट देती है
कर देती है
तार -तार


घावो से रक्त
नहीं निकलता है
फिर भी हर घाव
अंदर से सड़ता है
बनता नासूर
पकता -फूटता
बार-बार


यह चुभते तीर
 मौलवी -पीर के
धागा बाँधने से
नहीं निकलते
घायल ताउम्र
तड़पता -रोता है
जार -जार

कोई विजयी नहीं होता
कोई शहीद नहीं होता
लेकिन मर जाता है
रिश्तो का प्यार
बढ़ जाती है
आपसी तकरार
चीर -फाड़

होता है अचरज
दो इंच की जुबान
तीर चला सकती है
युद्ध करा सकती है
इसके आगे है
हर कोशिश बेकार
हर -बार

vandana bajpai

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