"आदत "
गम देने में शोक ना करना
मुझको गम की आदत है
कितने सावन सूखे काटे
कहा किसी से दर्द है बाँटे
तुम कोई अफ़सोस न करना
मुझे मौन कि आदत है
कच्ची नींद से मुझे जगाकर
गए जो तुम भी खाव्ब दिखाकर
आपने दिल पर बोझ न रखना
मुझे मदहोशी कि आदत है
अपनी धुन में लगी हुई थी
मन नदिया में फँसी हुई थी
तुम कोई संकोच न करना
मुझे भॅवर कि आदत है
vandana bajpai
19.12.13
गम देने में शोक ना करना
मुझको गम की आदत है
कितने सावन सूखे काटे
कहा किसी से दर्द है बाँटे
तुम कोई अफ़सोस न करना
मुझे मौन कि आदत है
कच्ची नींद से मुझे जगाकर
गए जो तुम भी खाव्ब दिखाकर
आपने दिल पर बोझ न रखना
मुझे मदहोशी कि आदत है
अपनी धुन में लगी हुई थी
मन नदिया में फँसी हुई थी
तुम कोई संकोच न करना
मुझे भॅवर कि आदत है
vandana bajpai
19.12.13
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