गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

aadat

                                                                       "आदत "



गम देने में शोक ना करना
मुझको गम की आदत है


कितने सावन सूखे काटे
कहा किसी से दर्द है बाँटे
तुम कोई अफ़सोस न करना
मुझे मौन कि आदत है


कच्ची नींद से मुझे जगाकर
गए जो तुम भी खाव्ब दिखाकर
आपने दिल पर बोझ न रखना
मुझे मदहोशी कि आदत है


अपनी  धुन में लगी हुई थी
मन नदिया  में फँसी हुई थी
तुम कोई संकोच न करना
मुझे भॅवर कि आदत है

vandana bajpai
19.12.13



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